पटना अस्पताल गोलीकांड : बुधवार की सुबह नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (NMCH), पटना में लोग अपनी-अपनी दिनचर्या में व्यस्त थे। तभी अचानक अस्पताल के इमरजेंसी विंग में अफरा-तफरी मच गई। पांच युवक, जो मोटरसाइकिल से आए थे, चेहरे पर मास्क लगाए और हथियारों से लैस होकर अस्पताल के अंदर घुस गए।
उनका सीधा निशाना था कमरा नंबर 205, जहां विकास दुबे नामक एक कुख्यात अपराधी इलाज के लिए भर्ती था। चंद सेकंड के भीतर हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं और मौके से भाग निकले।
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पीड़ित कौन था, और क्यों बन गया निशाना? पटना अस्पताल गोलीकांड
विकास दुबे बिहार के आपराधिक जगत में जाना-पहचाना नाम था। उस पर हत्या, अपहरण और अन्य गंभीर अपराधों के कई मामले चल रहे थे। जानकारी के अनुसार, वह पिछले कुछ महीनों से फरार था और बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जिस कमरे में वह था, वह सीसीटीवी निगरानी से बाहर था – जिससे हमलावरों को हमला करने में आसानी हुई।
सुरक्षा चूक या सुनियोजित हमला? पटना अस्पताल गोलीकांड
इस पूरे घटनाक्रम ने अस्पताल की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठा दिए हैं। हमलावरों ने न केवल फर्जी मेडिकल आईडी दिखाकर प्रवेश किया, बल्कि हमले का समय भी बहुत सोच-समझकर चुना गया – जब गार्ड्स की शिफ्ट बदली जा रही थी। पुलिस को शक है कि हमलावरों ने पहले से रैकी की थी और हमला पूरी योजना के तहत किया गया।
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हमले के बाद का माहौल और लोगों की प्रतिक्रिया :पटना अस्पताल गोलीकांड
घटना के बाद पूरे अस्पताल में हड़कंप मच गया। मरीज और स्टाफ घबराकर इधर-उधर छिपने लगे। नर्स रीना कुमारी ने तुरंत पुलिस को सूचित किया, लेकिन जब तक मदद पहुंचती, हमलावर भाग चुके थे। मौके से नौ खाली कारतूस बरामद हुए। मृतक के परिजनों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए और इसे “लापरवाही” करार दिया।
जांच में जुटी पुलिस, अहम सुराग मिले : पटना अस्पताल गोलीकांड
घटना के बाद पुलिस ने अस्पताल परिसर के CCTV फुटेज खंगाले। सभी हमलावर मोटरसाइकिल पर सवार थे और गाड़ियों की नंबर प्लेट मिट्टी से ढकी हुई थी। फॉरेंसिक जांच में पता चला कि गोलियां किसी विदेशी हथियार से चलाई गई थीं। शुरुआती जांच में यह आशंका जताई गई है कि यह हमला आपसी गैंग प्रतिद्वंद्विता का नतीजा हो सकता है।

राजनीतिक हलकों में उबाल, सरकार ने उठाए कदम : पटना अस्पताल गोलीकांड
इस वारदात के बाद राज्य की राजनीति भी गरमा गई। विपक्ष ने राज्य सरकार पर कानून व्यवस्था को लेकर निशाना साधा, वहीं स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था को सख्त करने की घोषणा की। अब हर अस्पताल में बायोमेट्रिक एंट्री और अतिरिक्त सीसीटीवी कवरेज की योजना बनाई जा रही है।
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सामाजिक चिंता: क्या अब अस्पताल भी सुरक्षित नहीं रहे?
स्थानीय लोगों में इस घटना के बाद भय और असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। एक स्थानीय निवासी सुरेश पांडे ने कहा, “अगर अस्पताल जैसी जगह पर ऐसा हो सकता है, तो आम जनता कहां सुरक्षित है?”
निष्कर्ष: सबक और सुधार की ज़रूरत : पटना अस्पताल गोलीकांड
यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि हमारी सुरक्षा प्रणाली के लिए एक चेतावनी है। अस्पतालों में केवल इलाज नहीं, सुरक्षा भी ज़रूरी है। समय रहते सुरक्षा मानकों को सुधारने और कर्मचारियों को आपातकालीन स्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण देने की ज़रूरत है। यह हम सभी की ज़िम्मेदारी बनती है कि ऐसी घटनाओं से सबक लेकर सतर्क और सजग रहें।
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